इस मौसम में ऐसे बचाव करें अपने लाड़ले को सर्दी-जुकाम से!

हर बार मौसम बदलने के साथ ही आम समस्याएँ उन लोगों को चपेट में ले लेती हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर होती है। सर्दी जुकाम और खाँसी ऐसी आम समस्याएँ हैं जो सभी को कभी न कभी परेशान कर देती हैं। आमतौर पर मौसम बदलने के साथ हम खुद नहीं बदलते और परिणाम भुगतते हैं।

सर्दियों की शुरुआत हो इससे पहले क्वांर की तीव्र धूप का महीना आता है। जमीन में नमी और वातावरण में उमस रहती है। इसकी वजह से शरीर को बहुत गर्मी महसूस होती है। यहीं लापरवाही हो जाती है। सर्दी और खाँसी के बैक्टेरिया को पनपने के लिए नम वातावरण और बढ़ा हुआ तापमान एक दम रास आता है।

बच्चे एक दिन के लिए भी स्कूल नहीं छोड़ना चाहते हैं जबकि जुकाम, बुखार और खाँसी के रोगाणु एक से दूसरे तक पहुँचते हैं। बच्चा यदि खाँसते वक्त मुँह पर रूमाल न रखे तो नाक और मुँह से निकले महीन नम कणों के साथ रोगाणु एक बड़े इलाके में झटके के साथ फैल जाते हैं। दूसरे बच्चे इससे संमित होते हैं।

पालकों को चाहिए कि वे संक्रमण के दौरान बच्चों को स्कूल से दूर ही रखें। वे चाहें तो स्कूल से संपर्क रखकर बच्चे को पढ़ाई में अपडेट रख सकते हैं। अब तो कई निजी स्कूलों में संमित बच्चों को वापस घर भेज दिया जाता है। पालकों को ईमेल के जरिए उस दिन की पढ़ाई की डीटेल भेज दी जाती है।

दरअसल किसी भी संमण को वहीं रोकने से बेहतर दूसरा उपाय नहीं है। स्वाइन फ्लू अथवा दूसरी बीमारियों के संमण को इसी तरह रोका जा सकता है। मौसम एकाएक नहीं बदलता और बदलने की जानकारी हमें पहले से होती है। संमण के प्रति पहले से जागरूक रहकर इस पर रोकथाम लगाई जा सकती है। खासतौर पर सर्दी जुकाम और खाँसी के संमण को तो काबू में रखा ही जा सकता है।

संतुलित आहार से रोग प्रतिरोधक शक्ति को सशक्त किया जाना चाहिए। विटामिन्स और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। मरीज अक्सर बिना किसी की सलाह के अपने मन से विटामिन्स सप्लिमेंट्स लेता रहता है। उसे यह जानकारी नहीं होती कि शरीर में किसी खास खनिज अथवा विटामिन्स की कमी है या नहीं।

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