हीनभावना को छोड़ते हुए खुद से भी प्यार करें

छोटी-बड़ी चीजें जो आपके जीवन में होती हैं उनकी प्रशंसा करना अपने रोजमर्रा की आदतों में शुमार कीजिए। अपने आप को नीचा दिखाना बंद कीजिए। हमें जीवन को जिस रूप में है, उसी रूप में स्वीकार करना चाहिए और जिसे टाला न जा सके उससे लड़ना बंद कर देना चाहिए।

आपको अपने भूत एवं वर्तमान को स्वीकारते हुए उसे बेहतर करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में कई बार हम ऐसे लोगों से मिलते हैं जो आपकी भावनाओं को आहत करते हैं या आपको लगता है कि उन्होंने आपको अनदेखा कर दिया है। सच यह है कि बहुसंख्यक लोग किसी को नीचा नहीं दिखाना चाहते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि लगता है कि वे बुरा व्यवहार कर रहे हैं जैसा कि कभी-कभी वे करते हैं।

मैं व्यक्तिगत रूप से सबसे अच्छे में विश्वास करता हूं और यदि किसी ने बुरा बर्ताव किया है तो मैं उसे ‘बेनिफिट ऑफ डाउट` देने का प्रयास करता हूं। हम दूसरों को अपनी उम्मीदों के आधार पर आंकते हैं कि उन्हें हमारे साथ या समाज में कैसा, आचरण अपनाना चाहिए। जब लोग हमारी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते हम उन्हें सही नहीं समझते हैं।

कुछ लोग ट्रैफिक कानून तोड़ते हैं मगर जब दूसरे ऐसा करते हैं तो उन्हें बुरा लगता है। कई बार लोग इतनी ऊंची उम्मीद लगाते हैं और आवश्यक रूप से पालन किये जाने वाले कानून बनाते हैं कि दूसरे लोगों को उस अनुसार व्यवहार करना मुश्किल होता है। इसलिए वे असहज एवं गुस्सा महसूस करते हैं।

हमें लोगों से वास्तविक उम्मीदें रखनी चाहिए। हमें यह सोच कर शुरुआत करनी चाहिए कि दूसरे ने जानबूझकर हमारे साथ गलत व्यवहार नहीं किया है। एक दिन जब मैं किसी कार्यक्रम में भाग लेने जा रहा था तो किसी ने मेरी गाड़ी को ठोक दिया। मैंने पाया कि यह सब उस दूसरे ड्राइवर की गलती से हुआ था। जब मेरा ड्राइवर उस दूसरे ड्राइवर से लड़ने को आतुर हुआ तो मैंने उसे रोका और कहा कि मैं उस खर्च का भार वहन करूंगा।

अपने मानसिक शांति एवं खुशी के लिए दूसरों की ’’बेनिफिट ऑफ डाउट’’ दें। आप दूसरों की तरह सोचें और तब निर्णय लें कि क्या कुछ अनेदखा किया जा सकता था। ऐसी स्थितियों को क्षणिक परेशानी की तरह ले न कि विनाश के तौर पर। किसी भी मसले या व्यक्ति के कुछ सकारात्मक एवं कुछ नकारात्मक पक्ष होते हैं। यह आप पर है कि आप सकारात्मक पक्ष की सराहना करें। उज्जवल पक्ष पर ध्यान देना आपके जीवन की गुणवत्ता में बड़ा अंतर लाएगा।

आपका मुख्य कार्य अपने भविष्य पर ध्यान देना है न कि इन छोटी-छोटी बातों पर उलझना। जितनी विस्तृत आपकी योजना होगी उसके सच होने के उतने ही आसार हैं। आप क्या प्राप्त करना चाहते हैं यह बिल्कुल स्पाट होना चाहिए। भाग्य पर कुछ भी न छोड़ें। अपना श्रोठ प्रयास करें और आपका श्रोठ आपको वापस मिलेगा। हर लक्ष्य की प्राप्ति के दो चरण होते हैं- योजना बनाना और उसे करना। आप योजना पर जितना समय खर्च करेंगे, लक्ष्य तक पहुंचना उतना ही आसान होगा।

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